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आज है ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत, जानिए पूजा विधि का विशेष महत्व, कैसे- मिलेगा पति को लंबी आयु का वरदान..

Jun 16 2019

Posted By:  AMIT

आज ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पड़ने वाला वट पूर्णिमा का व्रत मनाया जायेगा, यह वट पूर्णिमा व्रत महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और दक्षिण राज्यों में विशेष रूप से मनाया जाता हैं | लेकिन वहीं उत्तर भारत में यह व्रत वट सावित्री के रूप में मनाया जाता है, जो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पड़ता-आता हैं | इसके बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण यमराज से वापस खींचकर लाई थी और यही वजह है कि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत को रखती हैं | 


शास्त्रों ने और हिन्दू धर्म ने इस दिन को पूर्णिमा और अमावस्या को विशेष तिथि बताया है, इसलिए इस बार यह पूर्णिमा सोमवार को पड़ रही हैं | जिस वजह से आज के दिन को बहुत ही शुभ माना गया है वहीं ज्येष्ठ पूर्णिमा से अगले दिन आषाढ़ माह प्रारम्भ होगा | ये एक संयोग है कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या भी सोमवार के ही दिन पड़ी थी, इसलिए 15 दिन बाद अब शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा सोमवार को पड़ रही हैं | यह स्नान ज्येष्ठा नक्षत्र में होगा और ज्येष्ठ मास की समापन पूर्णिमा को ज्येष्ठा नक्षत्र आना ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से बेहद शुभ माना गया हैं | 



हमारे धर्म के अनुसार मान्यता है कि अमावस्या और पूर्णिमा सोमवार को आने से भगवान शिव और चंद्रमा दोनों ही प्रसन्न होते है और दोनों की कृपा सदैव इन व्रत रखने वाले परिवारों पर बनी रहती हैं | ज्योतिषियों ने बताया कि, ज्येष्ठ पूर्णिमा से अगले दिन आषाढ़ मास प्रारंभ होगा, जिसका समापन 16 जुलाई को चंद्र ग्रहण के साथ होगा | वही अगले माह पूर्णिमा को मंगलवार पड़ेगा,  संयोग यह है कि आषाढ़ मास की अमावस्या भी मंगलवार को ही पड़ेगी |


ऐसे करें व्रत 
महिलाएं इस दिन उपवास रखती है और वट वृक्ष के नीचे बैठ कर भगवान की पूजा आराधना करती हैं | इसके साथ ही एक बांस की टोकरी मे सात तरह के अनाज रखते जिसे कपड़े के दो टुकड़े से ढ़क देते है दूसरी और टोकरी में सावित्री की प्रतिमा रखते है फिर वट वृक्ष की जल, अक्षत, कुमकुम से पूजा करती हैं | इसके पश्चात लाल मौली से वृक्ष के सात बार चक्कर लगाते हुए ध्यान करती हैं | इस पूजन विधि के बाद सभी महिलाएं सावित्री की कथा सुनाती है और अपनी क्षमता के अनुसार दान दक्षिणा देते हुए अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं |

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